समस्तीपुर: शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के प्रति अटूट आस्था,विश्वास व समर्पण का अनोखा दृश्य रोसड़ा में देखने को मिल रहा है.शहर के महादेव मठ स्थित सिद्ध पीठ मनोकामना मंदिर में महिला व्रती मधुमाला अपनी मन्नत पूरी होने की मान्यता के बाद कठिन साधना में लीन हैं.वह सैकड़ों नुकीली कीलों पर लेटकर अपने सीने पर कलश स्थापित किए हुए हैं.नौ दिनों तक निर्जला व्रत रखकर मां दुर्गा की आराधना करने के उनके संकल्प की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है.उनकी इस अनोखी साधना को देखने व माता के प्रति उनकी श्रद्धा को नमन करने के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी है.मधुमाला की यह साधना केवल एक अनोखी पूजा का दृश्य नहीं,बल्कि उनके व्यक्तिगत विश्वास,संकल्प व माता के प्रति समर्पण की अभिव्यक्ति है.उनका कहना है कि वह लंबे समय से कलश स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करती आ रही हैं.इसी दौरान एक दिन उन्हें स्वप्न में माता के दर्शन होने का अनुभव हुआ.उनके अनुसार,स्वप्न में माता ने उनकी पूजा से प्रसन्न होकर उनसे इच्छा पूछी.इस पर उन्होंने माता के दर्शन की कामना व्यक्त की.मधु माला का दावा है कि इसके बाद उन्हें कील-कांटों पर लेटकर सीने पर कलश स्थापित कर आराधना करने का संदेश मिला.मधु माला ने बताया कि इसी अनुभव व अपनी आस्था से प्रेरित होकर उन्होंने कठिन साधना करने का संकल्प लिया.इस वर्ष वह अपने घर के अंदर बने माता के मंदिर के सामने सैकड़ों नुकीली कीलों पर लेटकर सीने पर कलश स्थापित किए हुए हैं.उनका विश्वास है कि मां दुर्गा की कृपा से उनके व उनके परिवार का कल्याण होगा.इसी विश्वास के साथ वह नवरात्र के नौ दिनों तक निर्जला व्रत रखकर माता की भक्ति में लीन रहने का संकल्प निभा रही हैं. नवरात्र के पावन अवसर पर मधुमाला की साधना आसपास के लोगों के बीच कौतूहल व श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है.उन्हें देखने पहुंच रहे श्रद्धालु मां दुर्गा के जयकारे लगाते हुए अपनी आस्था प्रकट कर रहे हैं.मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण के बीच माता की आराधना व जयघोष से माहौल आध्यात्मिक रंग में रंगा हुआ है.सनातन परंपरा में नवरात्र को शक्ति की उपासना,आत्मसंयम व साधना का पर्व माना जाता है.इन नौ दिनों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार व्रत,पूजा-पाठ एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं.मधुमाला की कठिन साधना इसी व्यक्तिगत आस्था व संकल्प के कारण क्षेत्र में विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है.हालांकि,कीलों पर लेटने व निर्जला व्रत जैसी कठिन साधनाओं में गंभीर शारीरिक जोखिम हो सकते हैं,इसलिए ऐसी साधना के दौरान सुरक्षा व स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी आवश्यक है. इस अवसर पर पं सुनील कुमार मिश्र के अलावे महिला के पति रंजीत चौरसिया,अभिलेष कुमार,मुकेश कुमार,चंदन कुमार,बबलू चौरसिया व्रती के रूप में उपस्थित थे.